
हरियाणा (Best E News) हरियाणा में श्रम कानून (Code on Wages / Minimum Wages Act) के तहत 1 अप्रैल 2026 से न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) में लगभग 35% की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा, दिवाली या वार्षिक वैधानिक बोनस (Statutory Bonus) का निर्धारण केंद्रीय पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट और नए वेज कोड के नियमों के तहत किया जाता है। हरियाणा सरकार और श्रम विभाग के नियमों के अनुसार ग्रेड वाइज वेतन और दिवाली बोनस की पूरी स्थिति नीचे दी गई है।
हडताल के बाजवूद नहीं मिला बोनस: बावल स्थित विक्टोरिया ओटो कंपनी में शुक्रवार को श्रमिकों ने बोनस व वेतन के लिए हडताल की। पूरे दिन हडताल रही। पुलिस प्रशासन भी हडताल के समय पहुचा। लेकिन हडताल करने के बावजूद प्रसाशन की ओर ठेकेदार कोई सवाल नही किया। हालाकि तो वेतन ठेकदार दिवाली के बाद में देना चाहता था वो हडताल के करने पर 6 नंवबर को श्रमिकों के खाते में डाल दिया गया। लेकिन बोनस अभी भी नही किया गया। सबसे अहम बात यह है श्रमिको को शोषण कब बंद होगा। ठेकेदारो की मनमानी पर रोक क्यों नहीं लगा पा रही है। श्रम काननू कहां सोया हुआ है। ठेकेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं। इन सबसे जबाव न तो उपायुक्त व न ही श्रम अधिकारी के पास है। कर्मयारियों ने ठेकदोंरो की मनमानी केा लेकर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जो रखें मांग उसे ही कर देते है बाहर : कई श्रमिको ने बताया हरियाणा में ठेकेदार इस कदर शोषण करते है जो भी बोनस या सुविधाओं को लेकर मांग करते है तो उसे बाहर कर देते है। बेरोजगारी के चलते श्रमिक इसका विरोध करने से डरते है। लेकिन सबसे दुख की बात यह है कि श्रम विभाग श्रमिकों के लिए हक के लिए जागरूक क्यों नहीं है। एक श्रमिक ने बताया कि उनके अनुभव वह कुशल श्रेणी में आता है लेकिन उसके अंकुशल का मानदेय दिया जाता है। कई बार उसने इसके लिए आवाज उठाई तो हटाने का कहा जा रहा है। अब भूखा मरता इंसान क्या करे मजबूरी में कम वेतन में काम करना पड रहा है।
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जानिए हरियाणा में ग्रेड वाईज कितना है वेतन
हरियाणा श्रम विभाग की अधिसूचना के अनुसार, राज्य में सभी जिलों के लिए वेतन की चार मुख्य श्रेणियां (Grades) तय की गई हैं
- श्रमिक श्रेणी (Grade) न्यूनतम मासिक वेतन (₹) न्यूनतम दैनिक वेतन (₹)
- अकुशल (Unskilled) ₹15,220.71 ₹585.41
- अर्ध-कुशल (Semi-Skilled) ₹16,780.74 ₹645.41
- कुशल (Skilled) ₹18,500.81 ₹711.56
- उच्च कुशल (Highly-Skilled ₹19,425.85 ₹747.14
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दिवाली (वार्षिक) बोनस के नियम
भारत और हरियाणा के श्रम नियमों के तहत ‘दिवाली बोनस’ नाम का कोई अलग से तय कानून नहीं है, बल्कि इसे वार्षिक वैधानिक बोनस (Statutory Bonus) कहा जाता है।
ऐसे सभी कर्मचारी जिनका मासिक वेतन (Basic + DA) ₹21,000 या उससे कम है और उन्होंने वित्तीय वर्ष में कंपनी में कम से कम 30 दिन काम किया हो। यह नियम उन सभी कंपनियों/फैक्ट्रियों पर लागू होता है जहां 20 या अधिक कर्मचारी काम करते हैं।
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जानिए कैसे तय बोनस की सीमा (Bonus Limits):
- • न्यूनतम बोनस (Minimum Bonus): वेतन का 8.33% (कंपनी को घाटा होने पर भी यह देना अनिवार्य है)।
- • अधिकतम बोनस (Maximum Bonus): कंपनी के मुनाफे (Allocable Surplus) के आधार पर यह अधिकतम 20% तक हो सकता है。
बोनस की गणना कैसे होती है? (Grade-wise)
बोनस एक्ट के तहत गणना की एक सीमा तय होती है। कानून के अनुसार, यदि किसी कर्मचारी का वेतन ₹7,000 से अधिक है, तो बोनस की गणना ₹7,000 या राज्य के तय न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) जो भी अधिक हो, उस पर की जाती है। चूंकि हरियाणा में न्यूनतम वेतन ₹15,220.71 से शुरू है (जो कि ₹7,000 से अधिक है), इसलिए बोनस की गणना संबंधित ग्रेड के पूरे न्यूनतम वेतन को आधार मानकर की जाएगी। यदि आपकी कंपनी न्यूनतम बोनस (8.33%) देती है, तो सालाना अनुमानित बोनस इस प्रकार तय होगा
• Unskilled (₹15,221 बेस): न्यूनतम सालाना बोनस लगभग ₹15,214
• Highly-Skilled (₹19,426 बेस): न्यूनतम सालाना बोनस लगभग ₹19,418
यदि कंपनी पूरे 20% (अधिकतम) की दर से बोनस देती है, तो यह राशि आपके सालाना कुल न्यूनतम वेतन का 20% हिस्सा होगी।
श्रम कानूनों को रोजगार कानून के रूप में भी जाना जाता है। वे कानूनों, प्रशासनिक फैसलों और मिसालों का समूह हैं जो कामकाजी लोगों और उनके संगठनों के कानूनी अधिकारों और प्रतिबंधों को संबोधित करते हैं। श्रम कानून किसी नियोक्ता या नियोक्ताओं के समूह और उनके कर्मचारियों के बीच संबंधों को विनियमित करने का प्रयास करते हैं। कानून की इस शाखा का व्यापक अनुप्रयोग है, क्योंकि यह कानून की किसी भी अन्य शाखा की तुलना में अधिक पुरुषों और महिलाओं को प्रभावित करती है। इसके व्यापक निहितार्थों और गतिशील पहलुओं के परिणामस्वरूप, इसे अध्ययन के लिए सबसे आकर्षक क्षेत्र भी माना जाता है।
ये कानून आम तौर पर कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा, सामूहिक सौदेबाजी, अनुचित श्रम प्रथाएं, यूनियनों का प्रमाणीकरण, श्रम-प्रबंधन संबंध, सामान्य छुट्टियां, वार्षिक छुट्टी, काम के घंटे, अनुचित समाप्ति, न्यूनतम वेतन, छंटनी (लेयऑफ) प्रक्रिया आदि जैसे मुद्दों को संबोधित करते हैं। भारत में, केंद्र सरकार ने लगभग 44 श्रम-संबंधी क़ानून प्रख्यापित किए हैं, जिनमें से 29 को चार नए श्रम संहिताओं में समेकित किया गया है। यह लेख भारत में कुछ श्रम कानूनों के साथ-साथ चार श्रम संहिताओं का सारांश प्रस्तुत करता है।
भारत में श्रम कानून कब बना: समाज में, संस्थाएँ उन अंतरालों से घृणा करने के लिए विकसित होती हैं जो परिवर्तन पीछे छोड़ जाते हैं। औद्योगिक क्रांति, एक ऐतिहासिक घटना है, जिसने समाज को ग्रामीण और कृषि से औद्योगिक और उपभोक्तावादी में पूरी तरह से बदल दिया। औद्योगिक क्रांति द्वारा लाए गए परिवर्तनों ने कुछ कमियाँ छोड़ दी थीं और उन कमियों को भरना समाज की ज़िम्मेदारी बन गई। उन अंतरालों को भरने के लिए, समाज ने कुछ सामाजिक उपकरणों की ओर रुख किया, जिन्हें श्रम कानून के रूप में जाना जाता है। श्रम कानून औद्योगिक क्रांति का परिणाम हैं और इनका गठन औद्योगिक क्रांति के दौरान उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए किया गया था।