
Haryana News (Best E News) हरियाणा सरकार ने गांवों में सालों से बने मकान दुकानों और दूसरे भूखंडों के मालिकाना हक को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। Haryana New Law के तहत अब आबादी देह में रहने वाले पात्र लोगों के संपत्ति संबंधी अधिकार सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाएंगे। प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति को मालिकाना हक का प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।
दरअसल हरियाणा के कई गांवों में ऐसे परिवार हैं जो कई पीढ़ियों से एक ही मकान में रह रहे हैं। उनके घर और दुकान तो बने हुए हैं लेकिन उनके पास मालिकाना हक साबित करने के लिए पक्के सरकारी कागज नहीं हैं। इसी परेशानी को दूर करने के लिए सरकार ने हरियाणा आबादी देह अधिकार निहित करने और स्वामित्व संबंधी विवाद सुलझाने अधिनियम 2025 लागू किया है। इसे 19 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था और इसमें 26 नवंबर 2025 से लागू होने का प्रावधान रखा गया है।
इस कानून के तहत गांवों में सर्वे कराया जाएगा और नक्शे तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मकान और भूखंड की पहचान की जाएगी। इसके बाद पात्र लोगों के नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी। हालांकि केवल लंबे समय से किसी मकान पर कब्जा होना ही मालिक बनने की गारंटी नहीं है। कानून में तय पात्रता पूरी करना जरूरी होगा। किरायेदार पट्टेदार और अस्थायी कब्जाधारियों को सिर्फ कब्जे के आधार पर मालिकाना हक नहीं मिलेगा।
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इस व्यवस्था में ग्रामीणों को अपने दावे पर आपत्ति दर्ज कराने का मौका भी दिया गया है। प्रस्तावित रिकॉर्ड और नक्शे सार्वजनिक किए जाएंगे। रिकॉर्ड सामने आने के बाद आमतौर पर 90 दिन के अंदर आपत्ति दी जा सकती है। आपत्ति मिलने पर अधिकारियों की ओर से दोनों पक्षों को सुनकर दस्तावेजों के आधार पर फैसला लिया जाएगा।
अगर किसी व्यक्ति को अधिकारी के फैसले से परेशानी है तो वह सामान्य तौर पर 30 दिन के भीतर अपील कर सकता है। इसके अलावा समीक्षा और आयुक्त के सामने पुनरीक्षण का विकल्प भी दिया गया है।
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ध्यान देने वाली बात यह है कि गांव की सड़क तालाब पार्क खेल मैदान और दूसरी साझा जमीन पर कब्जा करने से निजी मालिकाना हक नहीं मिलेगा। पंचायत की जमीन को केवल कब्जे के आधार पर किसी की निजी संपत्ति नहीं बनाया जा सकता।
Haryana New Law जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी रोहतक राजपाल चहल के मुताबिक इस कानून के तहत दर्ज प्रविष्टियों को सही माना जाएगा जब तक उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत या संशोधन न हो जाए। ऐसे में ग्रामीणों को अपने मकान और जमीन के कागजात हिस्सेदारी और सीमाओं की जांच समय रहते कर लेनी चाहिए।