
AIIMS Rewari (Best E News) 37वीं वर्षगांठ मना रहे रेवाड़ी जिले ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी अहम उपलब्धी हासिल की है। रेवाड़ी के गांव माजरा में 22 वें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का सपना साकार हो चुका है। यहां एमबीबीएस की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं जबकि अगले माह से ओपीडी शुरू होने जा रही है। एम्स में ओपीडी शुरू होने से न केवल रेवाड़ी बल्कि गुरुग्राम, भिवानी, महेंद्रगढ़, झज्जर और राजस्थान के नीमराना, अलवर, झुंझनु, कोटपूतली तक के लोगों को उपचार के लिए दिल्ली नहीं जाना पडेगां
देश के 22वें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स – AIIMS) की स्थापना हरियाणा के रेवाड़ी जिले के माजरा (भालखी) गांव में की गई। बता दे कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा सर्वप्रथम केंद्रीय बजट 2019-20 में की गई थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 फरवरी 2024 को आधिकारिक तौर पर इसका शिलान्यास किया था। बता दे कि एम्स में ओपीडी शुरू होने से न केवल रेवाड़ी बल्कि गुरुग्राम, भिवानी, महेंद्रगढ़, झज्जर और राजस्थान के नीमराना, अलवर, झुंझनु, कोटपूतली तक के लोगों को उपचार के लिए दिल्ली या दूर के बड़े अस्पतालों तक जाने की मजबूरी खत्म हो जाएगी।

AIIMS Rewari जानिए पूरी पूरी परियोजना: बता दें यह अत्याधुनिक अस्पताल लगभग 210 एकड़ भूमि पर फैला हुआ है और इसके निर्माण पर लगभग ₹1,650 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। इसमें 750 बिस्तरों (Beds) की सुविधा होगी, जिसमें एक बड़ा आईसीयू (ICU) नेटवर्क और 15-20 सुपर-स्पेशलिटी विभाग शामिल होंगे। यहाँ एक मेडिकल कॉलेज भी विकसित किया गया है जिसमें हर साल 100 एमबीबीएस (MBBS) सीटें और 60 बी.एससी नर्सिंग सीटें शामिल होंगी। शुरुआत में 50 सीटों के साथ बैच प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं
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AIIMS Rewari विवादों में रहा : हरियाणा के रेवाड़ी जिले के माजरा (भालकी) में बन रहा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) कई सालों तक अलग-अलग वजहों से विवादों और राजनीतिक खींचतान में रहा है। बता दे कि साल 2015 में मुख्यमंत्री की रैली के दौरान रेवाड़ी के मनेठी गांव में एम्स बनाने की घोषणा हुई थी। मनेठी पंचायत द्वारा दी गई करीब 235 एकड़ जमीन अरावली प्लांटेशन (फॉरेस्ट लैंड) के अंतर्गत आ रही थी, जिसके कारण केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEFCC) ने इस पर हरी झंडी देने से इनकार कर दिया। इस वन भूमि विवाद के चलते मनेठी में परियोजना लटक गई और ग्रामीणों को ‘एम्स संघर्ष समिति’ बनाकर लंबा आंदोलन करना पड़ा। आखिरकार, सरकार को स्थान बदलकर पास के ही माजरा गांव में ग्रामीणों के सहयोग से जमीन का इंतजाम करना पड़ा।
AIIMS Rewari जानिए कितनी होगी ओपीडी: इस एम्स के पूरी तरह चालू होने के बाद यहाँ प्रतिदिन लगभग 1,500 ओपीडी (OPD) मरीजों का इलाज और प्रति माह 1,000 आईपीडी (IPD) मरीजों को भर्ती करने की क्षमता होगी। एम्स प्रशासन और केंद्रीय मंत्रालय के अनुसार, यहाँ ओपीडी (OPD) सेवाएं और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं जल्द शुरू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। एम्स 750 बिस्तरों का अस्पताल होगा, जिसमें मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज सहित आईसीयू स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट सहित करीब 1500 व्यक्तियों को प्रतिदिन ओपीडी में देखने की सुविधाएं होंगी। इसके अलावा प्राइवेट वॉर्ड, ट्रॉमा बेड व आयुष बेड की सुविधाएं भी कैंपस में मिलेंगी। स्वास्थ्य सुविधाओं के बढ़ोतरी के साथ मेडिकल एजुकेशन, नर्सिंग और स्वास्थ्य संबंधित रिसर्च अनुसंधान को भी बढ़ावा मिलेगा
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निर्माण कार्य अंतिम चरण् में: परिसर में कुल 40 इमारतों और एक हेलीपैड का निर्माण कार्य भी अंतिम चरणों में है, जिसके बाद दक्षिण हरियाणा को एक बड़ा हेल्थकेयर हब मिल जाएगा। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि माजरा गांव में बनने वाले एम्स से हरियाणा के रेवाड़ी, भिवानी, महेंद्रगढ़, रोहतक, झज्जर, मेवात, पलवल व फरीदाबाद सहित राजस्थान के अलवर व झुंझुनू जिलों को भी इसका फायदा मिलेगा। 210 एकड़ में बनने वाले एम्स प्रत्यक्ष रूप से करीब 3000 व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 10 हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
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टेंडर रद्द होने पर राजनीतिक गतिरोध: इतना ही नहीं साल 2023 में रेवाड़ी एम्स के मुख्य निर्माण कार्य का टेंडर तकनीकी खामियों के चलते रद्द कर दिया गया था। इस फैसले पर एम्स संघर्ष समिति और विपक्षी दलों ने तीखा विरोध जताया था और इसे चुनाव से जुड़ी राजनीतिक साजिश करार दिया था। हालांकि, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने इसे एक प्रशासनिक प्रक्रिया बताया था। हाल ही में एम्स की ओपीडी सेवाएं शुरू होने की तैयारियों के बीच बीजेपी के स्थानीय नेताओं के बीच ही इसका श्रेय लेने की जंग छिड़ गई। हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इसका मुख्य श्रेय अपने पिता व केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के प्रयासों को दिया था।