शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

धारूहेड़ा खेल स्टेडियम: 10 साल से न पानी, न लाइट, न ही कोच ?

Written by: Harsh Rajput

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धारूहेड़ा (Best E News) औद्योगिक कस्बा स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में बदलाव हो चुका हैं। धारूहेड़ा खेल स्टेडियम में न ही कोई कोच की नियुक्ति हुई है न…


धारूहेड़ा खेल स्टेडियम का चेयरमैन अजय जांगडा ने किया निरीक्षण समस्याओं को लेकर खेल मंत्री को भेजी शिकायत
धारूहेड़ा खेल स्टेडियम का चेयरमैन अजय जांगडा ने किया निरीक्षण समस्याओं को लेकर खेल मंत्री को भेजी शिकायत
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धारूहेड़ा (Best E News) औद्योगिक कस्बा स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम सुविधाओं के अभाव में बदलाव हो चुका हैं। धारूहेड़ा खेल स्टेडियम में न ही कोई कोच की नियुक्ति हुई है न तो अब खिलाड़ी वहां जाते हैं। आलम यहां तक खेल परिसर पूर्णतया बदहाल हो चुका है। स्टेडियम में पिछले 10 साल से पानी लाइट और न ही कोच की सुविधा नहीं है। नपा चेयरमैन अजय जांगडा , पार्षद गोपाल, मोनू, विकास पंडित ने खेल स्टेडियम का निरीक्षण किया। स्टेडियम मे सुविधाएं की मांग को लेकर खेल मंत्री को लेटर व बदहाल स्टेडियम की फोटो भेजी गई हैं।

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धारूहेड़ा खेल स्टेडियम का चेयरमैन अजय जांगडा ने किया निरीक्षण समस्याओं को लेकर खेल मंत्री को भेजी शिकायत
धारूहेड़ा खेल स्टेडियम का चेयरमैन अजय जांगडा ने किया निरीक्षण समस्याओं को लेकर खेल मंत्री को भेजी शिकायत

सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं: औद्योगिक क्षेत्र के बीच स्थित होने के कारण न ही कोई कोच की नियुक्ति हुई है न तो अब खिलाड़ी वहां जाते हैं। बीच में कुछ समय कोच की तैनाती रही लेकिन अब नहीं है। बड़ी बात है कि स्टेडियम में देखरेख के अभाव में बड़ी-बड़ी घास उगी है। ट्रैक भी खराब है। न पानी की सुविधा है और टॉयलेट भी जर्जर है। बिल्डंग भी बदहाल हो चुकी है। आलम यहां तक कि अब स्टेंडियम कबाड बन चुका है।

15 साल पहले बना था राजीव गांधी खेल स्टेडियम: धारूहेड़ा विकास में भले ही विकसित हो रहा है, लेकिन खेलों में सुविधाएं नहीं है। युवाओं के भविष्य को देखते हुए 1 अगस्त 2006 में राजीव गांधी खेल परिसर के निर्माण के लिए शिलान्यास हुआ था। 23 जनवरी 2011 में स्टेडियम बनकर तैयार हो गया। चार पांच साल तो यहां खिलाडियोंं को खूब अभ्यास करवाया। इस खेल स्टेडियम ने पूजा यादव जैसे खिलाडी दी जिसने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। लेकिन वर्तमान में खेल परिसर की हालत जर्जर है।

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क्या कहते है खिलाड़ी: खिलाडी यश सैनी, अनिल, सुरेश, अंजू, सुरेंद्र ने बताया कि कई सालों से यहां पर कोच नहीं है। पहले यहां धारूहेड़ा ही नहीं दूर दराज से खिलाडी खेलने आते थे लेकिन अब सुविधाओं के अभाव अब सब बंद हो या गया है। अब यहां पर कोई नहीं आता है। खेल स्टेडियम कबाड बन चुका है। इसको लेकर कई बार शिकायतें की गई लेकिन कोई सुनवाई नही की जा रही है। करोडो रूपए की जमीन को रोक ​कर डाल दिया है।

धारूहेड़ा व आसपास के गांवों से खेल विभाग की ओर से नियुक्त प्रशिक्षक के नेतृत्व में प्रतिदिन 100 से अधिक युवा दौड़, डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो आदि का अभ्यास करने आते थे लेकिन प्रशिक्षक के तबादला होने से अब कोई भी यहां आने को तैयार ही नहीं है। खिलाड़ियों ने कई मेडल भी जीते थे। लेकिन आज एक भी खिलाड़ी यहां पर नही आता है। कई बार ​खेल अधिकारी को भी इसको लेकर अवगत करवाया जा चुका है। धारूहेड़ा केा छोडकर सभी स्टेंडियम के निमार्ण के लिए बजट मजूंर हो चुका है लेकिन इसको लेकर कोई सुनवाई नही की गई है

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स्टेडियम को निरीक्षण किया था, हालत बदहाल है। खेल मंत्री गौरव गौतम को शिकायत भेजी है ताकि यहां पर कोच नियुक्त किया जाए तथा सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए।
अजय जांगडा, चेयरमैन धारूहेड़ा

 

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Harsh Rajput
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हर्ष राजपूत Best E News के लिए स्थानीय मुद्दे, प्रशासन के फैसले, विकास कार्य, शिक्षा और आम लोगों से जुड़ी खबरें पाठकों तक पहुँचाते हैं। पिछले करीब छह साल से वह पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है। View all posts by Harsh Rajput →

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