
रेवाड़ी (Best E News) हरियाणा के जिला रेवाडी में 21 नवंबर को विशेष लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इस दिन चेक बाउंस से जुड़े मामलों के निपटारा किया जाएगा। बता दे कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित होने वाली यह लोक अदालत जिला न्यायालय रेवाड़ी के अलावा कोसली और बावल में भी लगेगी।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव डॉ. रेनू सोलखे ने बताया कि विशेष लोक अदालत में लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन स्तर के मामलों को भी रखा जा सकता है। इसका उद्देश्य आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से चेक बाउंस के मामलों का जल्द निपटारा करना है।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से मामला निपटने पर समय और धन की बचत होती है। इसके अलावा निर्धारित नियमों के अनुसार कोर्ट फीस भी वापस मिल जाती है। लोक अदालत से संबंधित अधिक जानकारी और सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की हेल्पलाइन नंबर 01274-220062 पर संपर्क किया जा सकता है
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लोक अदालतें का क्या है फायदा: लोक अदालतें (People’s Courts) भारत में एक वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) प्रणाली हैं, जिन्हें विवादों का त्वरित, लागत-कुशल और सौहार्दपूर्ण समाधान प्रदान करने के लिए बनाया गया है। विधिक सेवाएँ अधिनियम, 1987 के तहत संचालित, लोक अदालतें न्यायालयों पर बोझ कम करने और गैर-प्रतिस्पर्धी तरीके से न्याय दिलाने में मदद करती हैं।
जानिए कितने प्रकार की होती है लोक अदालते
- राष्ट्रीय लोक अदालत: पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती हैं ताकि बड़ी संख्या में मामलों का निपटान किया जा सके।
- राज्य/जिला लोक अदालतें: राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा नियमित अंतराल पर आयोजित की जाती हैं।
मोबाइल लोक अदालतें: ग्रामीण या दूरदराज़ के क्षेत्रों में जाकर तुरंत समाधान प्रदान करती हैं।
स्थायी लोक अदालतें: सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं जैसे परिवहन, बिजली, पानी आदि से जुड़े विवादों का समाधान करती हैं।
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इसके क्या फायदे है: बता दे कि दोनों पक्षों को विवाद हल करने पर सहमति देनी होती है।
कोई शुल्क नहीं लिया जाता और पहले से भरे गए कोर्ट शुल्क की वापसी होती है।
निर्णय का दर्जा एक सिविल कोर्ट के फ़ैसले के समान होता है। पुरस्कार अंतिम होता है और अपील नहीं की जा सकती, जिससे त्वरित समाधान सुनिश्चित होता है। कार्यवाही सरल, लचीली और नियमित अदालतों की तुलना में कम औपचारिक होती है।
लोक अदालतें किन मामलो का करती है निपटारा
- वैवाहिक और पारिवारिक विवाद
- मोटर दुर्घटना मुआवजा दावे
- धारा 138, NI Act के तहत चेक बाउंस मामले
- श्रम और रोजगार संबंधी विवाद
- भूमि और संपत्ति विवाद
- सार्वजनिक उपयोगिता सेवा विवाद (स्थायी लोक अदालतों के तहत)
- अपराध संबंधी मामले (जहाँ समझौता संभव हो)
लोक अदालतों के लाभ
त्वरित न्याय: लोक अदालतें मामलों का त्वरित और कुशल निपटान सुनिश्चित करती हैं। पारंपरिक अदालतों की तुलना में, जहाँ कार्यवाही महीनों या वर्षों तक चल सकती है, लोक अदालतों में विवाद अक्सर एक ही सत्र या कुछ ही बैठकों में हल हो जाते हैं। इससे न्यायपालिका पर बोझ कम होता है और न्याय में देरी नहीं होती।
नि:शुल्क प्रक्रिया: लोक अदालतों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह से नि:शुल्क है। कोई कोर्ट शुल्क नहीं है, और यदि मामला पहले से नियमित अदालत में दायर है, तो शुल्क वापस किया जाता है यदि मामला लोक अदालत में सुलझाया जाए। यह कानूनी उपायों को विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सुलभ और किफायती बनाता है।
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लंबी मुकदमेबाज़ी नहीं: लोक अदालत की कार्यवाही अनौपचारिक और गैर-तकनीकी होती है। इसमें जटिल कानूनी प्रक्रियाएँ या तकनीकी बातें नहीं होती। इससे पक्ष लंबी कानूनी लड़ाई से बचते हैं और बिना तनाव, विलंब और खर्च के समाधान तक पहुँचते हैं।
सहमति और समझौता: लोक अदालत आपसी सहमति पर आधारित है। दोनों पक्षों को समझौते के लिए सहमति देनी होती है, जिससे निर्णय सभी के लिए स्वीकार्य होता है। इससे वैमनस्य कम होता है और विशेष रूप से परिवार, संपत्ति और सामुदायिक मामलों में सामंजस्य बढ़ता है।
आमजन तक न्याय तक पहुँच: लोक अदालतें न्याय तक समान पहुँच के सिद्धांत को बनाए रखती हैं, खासकर गरीब, हाशिए पर रहने वाले और अशिक्षित वर्गों के लिए। कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाकर, लागत को समाप्त करके और मोबाइल लोक अदालतों व कानूनी सहायता शिविरों के माध्यम से, यह न्याय को सीधे उन लोगों के पास पहुँचाती हैं जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।