Sunday, 1 November 2026

अंबाला शहीदी स्मारक: 1857 की क्रांति की गवाह बनी अंबाला छावनी, अब 800 करोड़ में बना भव्य शहीदी स्मारक

Written by: Harsh Rajput

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Ambala News (Best E News) हरियाणा के अंबाला में 1857 की पहली आजादी की लड़ाई से जुड़ी यादों को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। अंबाला शहीदी स्मारक करीब 800…


अंबाला शहीदी स्मारक 1857 की क्रांति की गवाह बनी अंबाला छावनी, अब 800 करोड़ में बना भव्य शहीदी स्मारक
अंबाला शहीदी स्मारक 1857 की क्रांति की गवाह बनी अंबाला छावनी, अब 800 करोड़ में बना भव्य शहीदी स्मारक
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Ambala News (Best E News) हरियाणा के अंबाला में 1857 की पहली आजादी की लड़ाई से जुड़ी यादों को अब एक नई पहचान मिलने जा रही है। अंबाला शहीदी स्मारक करीब 800 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 5 नवंबर को इसका उद्घाटन करेंगे। करीब 22 एकड़ में फैला यह स्मारक देश की आजादी के लिए लड़ने वाले वीर सैनिकों की याद में बनाया गया है।

अंबाला की छावनी का नाम 1857 की क्रांति के इतिहास में खास जगह रखता है। उस समय यहां तैनात भारतीय सैनिकों के अंदर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा था। सैनिक अंग्रेज अधिकारियों के आदेश मानने से इनकार कर रहे थे और बैरकों में हथियार संभालने लगे थे।

इतिहास से जुड़े दस्तावेज बताते हैं कि अप्रैल 1857 में अंबाला में कई जगह आगजनी की घटनाएं हुई थीं। 22 अप्रैल को पांचवीं रेजिमेंट के मेस परिसर में आग लगा दी गई। इसके बाद अंग्रेज अधिकारियों के घरों और रेजिमेंट की संपत्ति को भी निशाना बनाया गया। इन घटनाओं से अंग्रेज अफसरों में डर बढ़ने लगा था।

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सैनिकों के गुस्से की एक बड़ी वजह चर्बी वाले कारतूस भी थे। उन्हें शक था कि अंग्रेज अधिकारी ऐसे कारतूस इस्तेमाल करने के लिए मजबूर करेंगे जो उनकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ थे। इसी बात ने सैनिकों और अंग्रेजी शासन के बीच पहले से चली आ रही नाराजगी को और बढ़ा दिया।

अंबाला शहीदी स्मारक 10 मई 1857 को अंबाला की छावनी में सैनिकों ने हथियार निकालकर अंग्रेज अधिकारियों के आदेश मानने से इनकार कर दिया था। वहीं विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने 500 ऊंट और 500 बैलगाड़ियों तक का इंतजाम किया था। अब इसी ऐतिहासिक धरती पर बना शहीदी स्मारक आने वाली पीढ़ियों को 1857 की लड़ाई और देश के वीर जवानों की कुर्बानी की कहानी बताएगा।

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Harsh Rajput
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हर्ष राजपूत Best E News के लिए स्थानीय मुद्दे, प्रशासन के फैसले, विकास कार्य, शिक्षा और आम लोगों से जुड़ी खबरें पाठकों तक पहुँचाते हैं। पिछले करीब छह साल से वह पत्रकारिता से जुड़ा हुआ है। View all posts by Harsh Rajput →

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